रायगढ़।
कारखानों में सुरक्षा नियमों को शायद कुछ प्रबंधन ने “सुझाव” समझ रखा था, लेकिन अब श्रम न्यायालय ने याद दिला दिया है कि कानून किताबों की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं बने हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद रायगढ़ जिले के 5 कारखानों के खिलाफ दर्ज मामलों में न्यायालय ने लाखों रुपये का अर्थदंड ठोक दिया है।
वर्षों तक नियमों को नजरअंदाज करने वाले जिम्मेदार को अब समझ आ रहा होगा कि हेलमेट, सुरक्षा उपकरण और श्रमिकों की सुरक्षा पर खर्च बचाना आखिर कितना महंगा पड़ सकता है।
उप संचालक राहुल पटेल के नेतृत्व में किए गए निरीक्षणों में कई गंभीर उल्लंघन सामने आए। नतीजा यह हुआ कि मई 2026 में श्रम न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक के जुर्माने लगाए।
जुर्माने की झलक
एक कंपनी को सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर 1 लाख रुपये का दंड।
दूसरी कंपनी को भी 1 लाख रुपये की चोट।
एक मामले में 25 हजार रुपये का जुर्माना।
एक उद्योग के दो जिम्मेदार अधिकारियों पर अलग-अलग 1-1 लाख रुपये का अर्थदंड।
एक अन्य प्रबंधक को भी 1 लाख रुपये का झटका।
व्यंग्य की बात
कारखानों में अक्सर बड़े-बड़े बोर्ड लगे मिल जाते हैं—”Safety First”। लेकिन लगता है कुछ जगहों पर इसका मतलब था, “Safety First… लेकिन बाद में देखेंगे!”
अब न्यायालय के आदेश के बाद शायद इन बोर्डों की अहमियत समझ में आए और सुरक्षा नियम सिर्फ दीवारों पर नहीं, जमीन पर भी दिखाई दें।
सवाल तो बनता है…
जब लाखों रुपये का जुर्माना लग सकता है, तो क्या पहले ही सुरक्षा उपायों पर ध्यान नहीं दिया जा सकता था? अगर नियमों का पालन समय पर होता, तो शायद न श्रमिकों की जान जोखिम में पड़ती और न ही प्रबंधन की जेब पर इतनी भारी चोट पड़ती।
फिलहाल संदेश साफ है—
“सुरक्षा में लापरवाही करोगे तो अदालत याद दिलाएगी कि नियम तोड़ना सस्ता सौदा नहीं है।”
